Hindi Insight: Oct 03, 2026

**बड़ी खबर: वैश्विक उथल-पुथल के बीच भारत की अर्थव्यवस्था Resilience पर केंद्रित, Kautilya Economic Conclave की शुरुआत**

नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं के दौर में, भारत अपनी आर्थिक नीतियों को ‘लचीलेपन’ (Resilience) के स्तंभ पर खड़ा करने की दिशा में अग्रसर है। इसी संकल्प को और मजबूत करने के उद्देश्य से राजधानी दिल्ली में आज, 3 अक्टूबर 2026 को बहुप्रतीक्षित 5वें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन (KEC 2026) का शुभारंभ हुआ। यह तीन दिवसीय सम्मेलन वैश्विक आर्थिक झटकों, व्यापारिक विखंडन, निवेश और तकनीकी नवाचारों पर गहन मंथन का मंच बनेगा।

**मुख्य बिंदु:**

* **सम्मेलन का एजेंडा:** “Resilience in an Age of Flux” (बदलाव के दौर में लचीलापन) की थीम के तहत आयोजित यह सम्मेलन, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता के बीच भारत की आर्थिक प्राथमिकताओं पर केंद्रित है।
* **उद्घाटन सत्र:** उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उद्घाटन भाषण दिया, जिसमें उन्होंने आर्थिक नीतियों द्वारा विकास, खुलेपन और संस्थागत विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए लचीलापन बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
* **वित्त मंत्री की विशेष उपस्थिति:** केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण एक विशेष सत्र में “Resilience in an Age of Flux: India’s Economic Priorities” पर अपने विचार रखेंगी।
* **वैश्विक दिग्गजों की भागीदारी:** इस सम्मेलन में 30 देशों के लगभग 180 से अधिक नीति-निर्माता, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद, वित्तीय विशेषज्ञ और अंतर्राष्ट्रीय विचारक भाग ले रहे हैं, जो वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर अपने विचार साझा करेंगे।
* **प्रमुख विषयों पर चर्चा:** सत्रों में डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उत्पादकता, व्यापार नेटवर्क का पुनर्गठन, ऊर्जा झटके, आपूर्ति-श्रृंखला व्यवधान और मैक्रोइकॉनॉमिक प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होगी।

**आम आदमी पर प्रभाव:**

यह सम्मेलन न केवल भारत की आर्थिक रणनीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति को मजबूत करने में भी सहायक होगा। अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ विचारों का आदान-प्रदान, घरेलू नीतियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और भविष्य की आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक मजबूत रणनीति विकसित करने में मदद करेगा। इससे अंततः देश के आम नागरिकों के लिए आर्थिक स्थिरता और विकास के नए मार्ग प्रशस्त हो सकते हैं।

यह आयोजन भारत की आर्थिक प्रगति के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो इसे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच एक मजबूत और लचीली अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *