**अप्रैल 2026 में थोक महंगाई 8.3% पर पहुंची, पश्चिम एशिया संकट का असर, खुदरा महंगाई 3.48% पर स्थिर**
**नई दिल्ली:** पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनावों के कारण कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में आई भारी वृद्धि का असर अब भारतीय अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है। अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर 3.5 साल के उच्चतम स्तर 8.3% पर पहुंच गई है, जो मार्च 2026 में 3.88% थी। वहीं, खुदरा महंगाई दर थोड़ी बढ़कर 3.48% पर स्थिर रही, जो पिछले महीने 3.40% थी।
**मुख्य बिंदु:**
* **थोक महंगाई में उछाल:** अप्रैल 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 8.3% हो गई। यह पिछले 42 महीनों में सबसे अधिक है।
* **ईंधन की कीमतें जिम्मेदार:** इस वृद्धि का मुख्य कारण कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और बिजली की कीमतों में हुई भारी वृद्धि है। अप्रैल 2026 में इन क्षेत्रों में मुद्रास्फीति 67.2% तक पहुंच गई।
* **खुदरा महंगाई स्थिर:** उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई अप्रैल 2026 में 3.48% दर्ज की गई, जो मार्च 2026 में 3.40% थी। यह उम्मीद से थोड़ी कम रही।
* **RBI की तटस्थ नीति:** भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 में अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा है और ‘तटस्थ’ रुख बनाए रखा है। वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, RBI ने घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती पर भरोसा जताया है।
**आम आदमी पर असर:**
थोक महंगाई में वृद्धि सीधे तौर पर आम आदमी की जेब पर असर डाल सकती है। हालांकि खुदरा महंगाई अभी नियंत्रण में दिख रही है, लेकिन ईंधन और बिजली की बढ़ी हुई कीमतें परिवहन लागत और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को बढ़ा सकती हैं। RBI द्वारा अपनी नीतिगत दरों को स्थिर रखने से फिलहाल ऋण सस्ता बने रहने की उम्मीद है, लेकिन भविष्य में मुद्रास्फीति के दबाव बढ़ने पर इसमें बदलाव आ सकता है। यह स्थिति कंपनियों के मुनाफे को भी प्रभावित कर सकती है, खासकर अगर वे बढ़ी हुई लागत को उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित नहीं कर पाते हैं।
