# भारत ने अक्षय ऊर्जा में रचा इतिहास: 288.58 GW पार हुई क्षमता, 500 GW का लक्ष्य अब हकीकत के करीब!
**नई दिल्ली:** भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में एक बार फिर अपनी धाक जमा दी है। देश की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन (non-fossil fuel) आधारित बिजली उत्पादन क्षमता 30 जून 2026 तक 288.58 गीगावाट (GW) के पार पहुँच गई है। यह आंकड़ा न केवल पिछली उपलब्धियों को पीछे छोड़ता है, बल्कि 2030 तक 500 GW के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मजबूत कदम भी दर्शाता है।
**मुख्य बिंदु:**
* **सौर ऊर्जा का बोलबाला:** कुल 162.15 GW सौर ऊर्जा क्षमता के साथ, यह क्षेत्र सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है। हाल के वर्षों में, विशेष रूप से छत पर सौर (rooftop solar) और वितरित सौर (distributed solar) परियोजनाओं ने इसमें अहम भूमिका निभाई है।
* **पवन ऊर्जा की बढ़ती रफ्तार:** 57.44 GW की स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता के साथ, यह क्षेत्र भी लगातार प्रगति कर रहा है। FY 2025-26 में 6,057 MW की रिकॉर्ड वार्षिक क्षमता वृद्धि दर्ज की गई, जो इस क्षेत्र में आई तेजी को दर्शाती है।
* **अन्य स्रोत भी महत्वपूर्ण:** कुल 288.58 GW में 57.24 GW जलविद्युत (hydro power) और 11.75 GW बायोपावर (bio power) का भी योगदान शामिल है।
* **गैर-जीवाश्म ईंधन का बढ़ता प्रभुत्व:** कुल गैर-जीवाश्म ईंधन बिजली उत्पादन क्षमता 297.36 GW तक पहुँच गई है, जिसमें परमाणु ऊर्जा (nuclear capacity) का 8.78 GW भी शामिल है।
* **समय से पहले लक्ष्य प्राप्ति:** भारत ने जून 2025 में ही 50% गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का लक्ष्य हासिल कर लिया था, जो 2030 की समय सीमा से पांच साल पहले था।
**आम आदमी पर असर:**
इस रिकॉर्ड-तोड़ प्रगति का सीधा असर आम आदमी पर बिजली की लागत में कमी और बेहतर ऊर्जा सुरक्षा के रूप में दिखेगा। स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों पर बढ़ते निर्भरता से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि भारत वैश्विक स्तर पर ऊर्जा के क्षेत्र में एक आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में भी स्थापित होगा। यह देश के सतत विकास और जलवायु परिवर्तन से लड़ने के संकल्प को भी मजबूती देता है।
