**RBI ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विकास दर पर रहेगी नजर**
**नई दिल्ली:** भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखने का फैसला किया है। रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा गया है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति के दबाव को देखते हुए एक संतुलित कदम माना जा रहा है।
**मुख्य बिंदु:**
* **रेपो रेट स्थिर:** RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बनाए रखने का निर्णय लिया है। यह लगातार दूसरी बार है जब दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
* **विकास दर का अनुमान:** वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP विकास दर का अनुमान 6.9% पर बरकरार रखा गया है, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा कीमतों में अस्थिरता जैसे बाहरी कारक इस पर असर डाल सकते हैं।
* **मुद्रास्फीति पर नियंत्रण:** मार्च 2026 तक खुदरा मुद्रास्फीति 3.4% पर रही है, जो RBI के लक्ष्य 4% (±2%) के भीतर है। हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा और अन्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि मुद्रास्फीति पर ऊपरी दबाव डाल सकती है।
* **वैश्विक प्रभाव:** पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए प्रमुख चिंताएं हैं। IMF और ADB जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी वैश्विक अनिश्चितताओं का हवाला देते हुए विकास दर के अनुमानों में मामूली संशोधन किए हैं।
* **सकारात्मक संकेत:** वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनावों में कमी की उम्मीदों और अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर टैरिफ में कटौती से सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मदद मिल सकती है।
**आम आदमी पर असर:**
ब्याज दरों में स्थिरता का मतलब है कि मौजूदा लोन की EMI में तत्काल कोई बदलाव की संभावना नहीं है। यह उद्योग जगत के लिए भी एक प्रकार की स्थिरता लाता है, जिससे निवेश के निर्णय लेने में आसानी हो सकती है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि का अप्रत्यक्ष प्रभाव आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।
यह निर्णय दर्शाता है कि RBI मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए सतर्कता बरत रहा है, ताकि मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखते हुए आर्थिक विकास को भी गति दी जा सके।
