नई दिल्ली: भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अभूतपूर्व कदम उठाया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित सभी पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों की टेक्नोलॉजी को भारतीय रक्षा कंपनियों को सौंपने की मंजूरी दे दी है। यह फैसला देश को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
मुख्य बिंदु:
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की पारंपरिक मिसाइल टेक्नोलॉजी को घरेलू कंपनियों को हस्तांतरित करने को मंजूरी दी है。
- इस कदम का उद्देश्य मिसाइल कार्यक्रमों को विकास से औद्योगिक उत्पादन की ओर ले जाना है。
- यह पहल भारतीय रक्षा उद्योग में घरेलू कंपनियों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी बढ़ाएगी。
- घरेलू कंपनियों को मिसाइल सिस्टम के उत्पादन के लिए योग्यता, प्रमाणन और नियामक आवश्यकताओं को पूरा करना होगा。
- भारत का रक्षा उत्पादन पिछले एक दशक में काफी बढ़ा है, 2026 तक यह ₹1.80 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि निर्यात भी ₹39,000 करोड़ तक पहुंच गया है。
- रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र का योगदान बढ़कर 45.16% हो गया है。
आम आदमी और राष्ट्र पर प्रभाव:
इस महत्वपूर्ण निर्णय से न केवल भारत की रक्षा क्षमताएं मजबूत होंगी, बल्कि यह देश को रक्षा उपकरणों के निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की सामरिक स्वायत्तता बढ़ेगी। घरेलू कंपनियों को उत्पादन का अवसर मिलने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को और गति मिलेगी। यह कदम भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतीक है।
