**नई दिल्ली:** देश के पूर्वी हिस्से में रेल संपर्क को मजबूत करने के लिए भारतीय रेलवे ने बिहार के सीमांचल क्षेत्र में एक बड़े विस्तार की योजना बनाई है। इस पहल के तहत 764 किलोमीटर नई रेल लाइनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में यात्री सेवाओं, माल ढुलाई और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
यह महत्वपूर्ण परियोजना बिहार के उन जिलों को पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से बेहतर ढंग से जोड़ेगी जो रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं। सीमांचल क्षेत्र, जिसमें पूर्णिया, कटिहार, अररिया और किशनगंज जैसे जिले शामिल हैं, नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं से भी सटा हुआ है।
**परियोजना के मुख्य बिंदु:**
* **लंबी दूरी की परियोजना:** 764 किलोमीटर नई रेल लाइनों का निर्माण किया जाएगा, जो सीमांचल क्षेत्र, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच रेल संपर्क को सुगम बनाएगा।
* **आर्थिक विकास को बढ़ावा:** इस विस्तार से यात्री सुविधाओं में सुधार होगा, माल की आवाजाही तेज होगी और क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी।
* **रणनीतिक महत्व:** यह परियोजना भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों के बीच रेल संपर्क को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
* **अन्य विकास कार्य:** इसी के साथ, बिहार के पटना के आसपास ₹976 करोड़ की लागत से दानापुर-फतुहा विस्तार पर भी काम चल रहा है, जिससे 22 अतिरिक्त यात्री और 18 मालगाड़ियों के लिए रास्ता तैयार होगा।
इस परियोजना से न केवल बिहार के सीमांचल क्षेत्र का विकास होगा, बल्कि यह पूरे पूर्वी भारत के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक हब के रूप में उभरने की क्षमता रखता है। रेलवे द्वारा बुनियादी ढांचे में यह निवेश देश के विकास की गति को और तेज करेगा।
