राष्ट्रीय स्तर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, हरियाणा सरकार ने 10 सितंबर 2026 को तीन नई योजनाओं की घोषणा की है. ये योजनाएं MSME सेक्टर को वित्तीय सहायता प्रदान कर उनके विकास को गति देने का लक्ष्य रखती हैं. इन पहलों से राज्य के हजारों छोटे व्यवसायों को सीधा लाभ मिलेगा, जिससे उनकी परिचालन लागत कम होगी और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी.
इन नई योजनाओं के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- किराये के भवन में चल रहे MSME को सालाना ₹5 लाख तक की प्रतिपूर्ति प्रदान की जाएगी, जिससे उनके लीज रेंट का एक बड़ा हिस्सा सरकार वहन करेगी.
- नई MSME इकाइयों को ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलेगा, जिससे उन पर वित्तीय बोझ कम होगा और वे आसानी से अपना व्यवसाय स्थापित कर पाएंगे.
- ई-कार्गो वाहन खरीदने वाले MSME को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे वे अपने लॉजिस्टिक्स को आधुनिक बना सकेंगे और पर्यावरण अनुकूल परिवहन समाधान अपना सकेंगे.
इन योजनाओं का सीधा असर आम आदमी और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. MSME सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 31% का महत्वपूर्ण योगदान देता है और करोड़ों लोगों को रोजगार प्रदान करता है. हरियाणा सरकार की यह पहल न केवल राज्य में उद्यमशीलता को बढ़ावा देगी बल्कि अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है. इससे छोटे व्यवसायों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने में भी मदद मिलेगी, जो उन्हें 2026 में व्यापार में क्रांति लाने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने में सक्षम बनाएगी. सरकार के इस कदम से ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को और मजबूती मिलेगी, जिससे देश में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक विकास को नई दिशा मिलेगी.
