देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 11 दिनों में पेट्रोल ₹7.38 प्रति लीटर और डीजल ₹7.48 प्रति लीटर तक महंगा हो गया है, जिससे आम आदमी की मुश्किलें बढ़ना तय है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन से लेकर रोज़मर्रा की चीज़ों तक पर पड़ेगा।
- कीमतों में भारी वृद्धि: 15 मई से शुरू हुई पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है, जिससे आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
- ट्रांसपोर्टेशन पर असर: पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें सीधे तौर पर ट्रांसपोर्टेशन लागत को बढ़ाएंगी, जिसका खामियाजा अंततः ग्राहकों को भुगतना पड़ेगा।
- खाद्य पदार्थों पर भी असर की आशंका: ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से खाद्य पदार्थों और अन्य ज़रूरी चीज़ों की कीमतों में भी वृद्धि होने की संभावना है।
- सोने-चांदी पर भी बढ़ी ड्यूटी: इसके साथ ही, सरकार ने गैर-ज़रूरी आयात को नियंत्रित करने के लिए सोना और चांदी पर आयात शुल्क भी 15% तक बढ़ा दिया है।
यह मूल्य वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ रही हैं और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के कारण सप्लाई चेन में बाधाएं आ रही हैं। विश्लेषकों का अनुमान है कि इससे मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 4-4.5% तक पहुंच सकती है, और जून तक यह 4.5-5% तक जा सकती है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक जून में होनी है, और माना जा रहा है कि RBI ब्याज दरों में तत्काल वृद्धि के बजाय स्थिति पर ‘प्रतीक्षा करें और देखें’ वाले रुख अपना सकती है। RBI की नजर महंगाई के इन दबावों पर बनी हुई है, और भविष्य में किसी भी बड़े कदम से पहले वह इसके असर का पूरी तरह आकलन करेगी।
