कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला: 80 करोड़ से ज़्यादा लोगों को मिलेगी खाद्य और आर्थिक सुरक्षा, ₹25,530 करोड़ की महा-योजना मंजूर

देश के 80 करोड़ से भी अधिक नागरिकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 25,530 करोड़ रुपये की एक वृहद योजना को मंजूरी दे दी है। यह फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया, जिसका सीधा लाभ गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को मिलेगा।

प्रमुख बिंदु:

  • यह महा-योजना 27 मई, 2026 को केंद्रीय कैबिनेट द्वारा स्वीकृत की गई है, जिसका उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा को सुदृढ़ करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करना है।
  • इस योजना से देश की लगभग दो-तिहाई आबादी, यानी 80 करोड़ से ज़्यादा गरीब और मध्यमवर्गीय नागरिक सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे।
  • प्राथमिक तौर पर यह योजना खाद्य सुरक्षा, कृषि अवसंरचना (Infrastructure) और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर केंद्रित है।
  • योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से आगे कार्यान्वयन किया जाएगा।
  • इसके प्रमुख उद्देश्यों में किसी भी नागरिक को भुखमरी का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना और सभी तक पोषणयुक्त खाद्य सामग्री की पहुँच बनाना शामिल है।
  • आधुनिक भंडारण प्रणाली (Modern Storage System) विकसित की जाएगी, जिसमें अनाज के भंडारण और वितरण नेटवर्क को डिजिटल और आधुनिक बनाना शामिल है, जिससे बर्बादी (Wastage) कम हो सके।
  • योजना के बजट को चार मुख्य क्षेत्रों में बांटा गया है: आपूर्ति श्रृंखला के आधुनिकीकरण और GPS ट्रैकिंग के लिए, ग्रामीण क्षेत्रों में नए आधुनिक गोदाम और शीत गृह (Cold Chains) बनाने के लिए, राशन दुकानों को 5G और आधुनिक बायोमेट्रिक उपकरणों से लैस करने के लिए, और पोषण युक्त फोर्टिफाइड अनाज की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए।

आम आदमी पर प्रभाव:

केंद्र सरकार का यह दूरदर्शी कदम वैश्विक अनिश्चितताओं और बदलती आर्थिक परिस्थितियों के बीच देश के नागरिकों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करने में मील का पत्थर साबित होगा। इस योजना से न केवल देश के करोड़ों परिवारों को मुफ्त और रियायती खाद्यान्न की निरंतरता सुनिश्चित होगी, बल्कि यह मुद्रास्फीति (Inflation) से राहत दिलाने और मानव संसाधन को मजबूत करने में भी सहायक होगी। यह निवेश केवल वित्तीय आवंटन नहीं, बल्कि देश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भरता के संकल्प को भी रेखांकित करता है।

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