**Headline:**
**RBI का बड़ा फैसला: रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं, FY27 के लिए महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान**
**Article:**
नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रैल 2026 के लिए अपनी मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए सभी को चौंका दिया है। केंद्रीय बैंक ने आम आदमी को महंगाई से राहत देने या कर्ज सस्ता करने की उम्मीदों को फिलहाल टाल दिया है। मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में वैश्विक अनिश्चितताओं, खासकर पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और इसके कारण कच्चे तेल की कीमतों में हो रही वृद्धि को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। समिति ने वित वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर का अनुमान 4.6% पर बरकरार रखा है, जो पिछले वित वर्ष के 2.1% से काफी ज्यादा है।
**मुख्य बिंदु:**
* **रेपो रेट स्थिर:** रेपो रेट 5.25% पर बना रहेगा, जिससे होम लोन, कार लोन और अन्य खुदरा लोन की ईएमआई में तत्काल कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
* **नीतिगत रुख ‘न्यूट्रल’:** आरबीआई ने ‘न्यूट्रल’ नीतिगत रुख को जारी रखा है, जिसका मतलब है कि भविष्य में दरों में कटौती या वृद्धि दोनों की संभावना बनी रहेगी।
* **महंगाई का अनुमान:** वित वर्ष 2026-27 के लिए महंगाई दर 4.6% रहने का अनुमान है, जो ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों जैसे जोखिमों को दर्शाता है।
* **जीडीपी वृद्धि:** वित वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 6.9% कर दिया गया है, जो पहले 7.4% था। इसका मुख्य कारण वैश्विक अनिश्चितताएं हैं।
**आम आदमी पर असर:**
इस फैसले का सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा, क्योंकि कर्ज की ब्याज दरें फिलहाल स्थिर रहेंगी। हालांकि, सरकार और आरबीआई महंगाई को काबू में रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। यह निर्णय वैश्विक आर्थिक परिदृश्य की अनिश्चितताओं के प्रति केंद्रीय बैंक की सतर्कता को दर्शाता है।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में वैश्विक स्थिति कैसी करवट लेती है और इसका भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ता है।
