केंद्र सरकार ने पिछले महीने (मार्च 2026) पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में बड़ी कटौती की घोषणा की थी। यह कदम वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी उछाल के बीच आम आदमी को महंगाई से राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया था। हालांकि, इस कटौती का सीधा असर खुदरा दामों पर न के बराबर देखने को मिला है।
* **₹10 प्रति लीटर की कटौती:** सरकार ने पेट्रोल और डीज़ल दोनों पर ₹10 प्रति लीटर की एक्साइज़ ड्यूटी कम की है।
* **कीमतों में स्थिरता का दावा:** इस कटौती का मुख्य उद्देश्य आम उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से बचाना और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण हो रहे भारी नुकसान से कुछ हद तक उबारना था।
* **कीमतों पर असर सीमित:** कई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस एक्साइज़ ड्यूटी कटौती का लाभ सीधे तौर पर उपभोक्ताओं तक नहीं पहुंचा है, बल्कि इसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा अपने नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
* **वैश्विक कारण:** पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और इसके कारण तेल आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों को काफी बढ़ा दिया था।
यह कदम जहां सरकार द्वारा महंगाई को नियंत्रित करने के प्रयासों को दर्शाता है, वहीं आम आदमी को तत्काल राहत मिलने की उम्मीदें फिलहाल सीमित नजर आ रही हैं। पेट्रोल-डीज़ल के भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार के साथ-साथ सरकारी नीतियों पर भी निर्भर करते हैं, और आने वाले दिनों में इनमें किसी बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल कम दिख रही है।
