नई दिल्ली: 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू की गई ‘डिजिटल इंडिया’ पहल ने पिछले एक दशक में देश को एक डिजिटल शक्ति के रूप में स्थापित कर दिया है। यह सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक जन आंदोलन बन गया है, जिसने शासन, सेवाएं और आम आदमी के जीवन जीने के तरीके को पूरी तरह से बदल दिया है।
डिजिटल इंडिया की 10वीं वर्षगांठ पर, आइए जानते हैं इस यात्रा की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियां और इसका आम आदमी पर पड़ा गहरा असर:
- कनेक्टिविटी में क्रांति: 2014 में जहाँ भारत में सिर्फ 25 करोड़ इंटरनेट कनेक्शन थे, वहीं आज यह संख्या बढ़कर 97 करोड़ से ज़्यादा हो गई है। देश के दूर-दराज के गांवों से लेकर अग्रिम सैन्य चौकियों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचा है। 42 लाख किलोमीटर से ज़्यादा ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा चुकी है, जो पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी से ग्यारह गुना ज़्यादा है।
- डिजिटल पेमेंट्स का बोलबाला: भारत का रियल-टाइम डिजिटल भुगतान सिस्टम, UPI, आज विश्व में अव्वल है। यह सालाना 100 अरब से ज़्यादा ट्रांजैक्शन संभालता है, जो दुनिया भर के रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स का लगभग आधा है।
- पारदर्शी शासन: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सरकार सीधे नागरिकों के खातों में 44 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की राशि भेज चुकी है, जिससे बिचौलियों का खात्मा हुआ है और लगभग 3.48 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई है।
- रोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा: ONDC (Open Network for Digital Commerce) जैसे प्लेटफॉर्म्स ने छोटे विक्रेताओं और कारीगरों को सीधे ग्राहकों से जोड़ा है, जिससे उन्हें व्यापक बाज़ार मिला है। GeM (Government e-Marketplace) के ज़रिए आम लोग सरकारी विभागों को सामान और सेवाएं बेच पा रहे हैं।
- नागरिकों का सशक्तिकरण: आधार, CoWIN, DigiLocker जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) ने न केवल भारत को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई है, बल्कि नागरिकों को अपनी पहचान, दस्तावेज़ और स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने की सुविधा भी दी है।
- ग्रामीण भारत का विकास: भारतनेट परियोजना ने 2.18 लाख ग्राम पंचायतों को हाई-स्पीड इंटरनेट से जोड़ा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि संबंधी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं।
आम आदमी पर असर:
डिजिटल इंडिया ने आम आदमी के जीवन को कई मायनों में आसान बनाया है। सरकारी योजनाओं का लाभ अब सीधे खातों में आता है, जिससे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा है। ऑनलाइन शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं और बैंकिंग की सुलभता ने दूरियों को मिटा दिया है। छोटे व्यापारी और विक्रेता अब अपनी पहुंच बढ़ा सकते हैं और अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। कुल मिलाकर, डिजिटल इंडिया ने भारत को एक ‘डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था’ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है।
